Press Release

सत्याग्रह यात्रा 2017 पहुंची दिल्ली दिल्ली।14 अप्रैल, 2017। नवधान्य तथा सहयोगी संस्थाओं की ओर से आयोजित सत्याग्रह यात्रा 2017 आज मेरठ से दिल्ली पहुंची। इस यात्रा का नेतृत्व नवधान्य की संस्थापिका डा. वंदना शिवा कर रही हैं। ज्ञात हो कि यह यात्रा गांधी जी के चम्पारण सत्याग्रह के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित की गई है। इस अवसर पर दिल्ली हाट, नई में आयोजित एक सभा में डा. वंदना शिवा ने कहा- महात्मागांधी एवं सत्याग्रहियों ने हमें आजादी दिलाई है, इसे आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है। आज समय आ गया है कि हम असली आजादी के लिए मिलकर आगे आएं। डा. शिवा ने कहा कि जब तक विदेशी कम्पनियां हमारे बीज और हमारे खेतों पर कब्जा करेंगे तथा किसानों को लूटेंगे, तब तक हम सही मायने में आजाद नहीं हैं। डा. वंदना शिवा ने कहा कि गांधी जी के सत्याग्रह से प्रेरणा पाकर उन्होंने आज से 30 साल पहले नवधान्य की स्थापना की और बीज सत्याग्रह देशभर में फैलाया। उनका कहना था कि प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के 160 साल, चम्पारण सत्याग्रह के सौ-साल तथा बीज सत्याग्रह के 30 साल पर नवधान्य सहित देश भर की सैकड़ों संस्थाएं, विद्यार्थी एवं किसान जैविक भारत 2047 का संकल्प ले रहे हैं। इस अवसर पर पर्यावरण एवं सभ्यता सत्याग्रह के कार्यकर्ता, श्री बलजीत सिंह ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम के अंत में आजादी की लड़ाई में शहीद हुए लोगों के परिवार जनों को भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर दिल्ली हाट स्थित नवधान्य जैविक स्टॉल पर बैशाखी उत्सव मनाया गया, जिसमें देशभर के विविभन्न राज्यों से सम्बंधित विविध व्यंजनों को परोसा गया। नवधान्य के डी.एस.नेगी, इंद्र कुमार सिंह, नेहा राज सिंह, दिनेश चंद्र सेमवाल, चंद्रशेखर भट्ट रेणू बिष्ट, पायल सिंह, साहनी, बार्बरा एवं अन्य सहयात्री भी इस अवसर पर उपस्थित रहे। इस अवसर पर दिल्ली क्षेत्र के किसान तथा महिला अन्न स्वराज समूहों में भारी संख्या में उपस्थिति दर्ज कराई। इस समय पर जैविक भारत 2047 पर हिंदी और अंग्रेजी में प्रकाशित पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। इस समय पर जैविक भारत 2047 के लिए संकल्प पत्र भी पढ़ा गया। यह यात्रा मेरठ-दिल्ली-बनारस-पटना-चम्पारण-सिंगूर-नंदीग्राम होते हुए बालासौर तथा भुवनेश्वर तक जा रही है।। इस यात्रा को कई नागरिक व सामाजिक संगठन, विश्वविद्यालय तथा राज्य सरकारें अपना समर्थन दे रहे हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य 2047 तक भारत को पूर्णरूप से जैविक बनाने के लिए, आने वाले समय में जैविक खेती और जैविक भोजन के बारे में देशभर में जनजागरूकता फैलाना है। यह सत्याग्रह यात्रा मेरठ से प्रारम्भ हो गया, जहां से ईस्ट इंडिया कम्पनी के खिलाफ 1857 में स्वतंत्रता का पहला आंदोलन शुरू हुआ था। मेरठ से सत्याग्रहियों की टोली बनारस जाएगी, जहां 1810 में घर कर के विरूद्ध हुए आंदोलन के क्रांति वीरों को याद करेंगे। 17 अप्रैल को हमारी यात्रा चम्पारण पहुंचेगी, इसी दिन से महात्मागांधी ने नील की जबरन खेती के विरूद्ध सत्याग्रह प्रारम्भ किया था। चम्पारण से हम सिंगूर और नंदीग्राम के उन समुदायों से मिलेंगे, जिन्होंने भू सत्याग्रह के माध्यम से अपनी भूमि पर हो रहे कब्जे को रोका। 1930 के नमक सत्याग्रहियों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद, हम नमक सत्याग्रह मार्ग से होते हुए उड़ीसा पहुंचेंगे। उड़ीसा स्थित नवधान्य के सामुदायिक बीज बैंक जाकर हम ’पृथ्वी दिवस’ यानी ’अर्थ डे’ के अवसर पर सत्याग्रह यात्रा का समापन करेंगे। जबजब भारत में चक्रवात, सुनामी और भयंकर सूखे ने दस्तक दी, तबतब नवधान्य के इस सामुदायिक बीज बैंक ने देशभर में आशा के बीज फैलाये। हम इसी स्थान पर धरती की रक्षा के साथ ही बीजों को बचाने और बोने की स्वतंत्रता के लिए सत्याग्रह के संकल्प को दोहराएंगे। हम सभी जानते हैं कि पृथ्वी और उसके सभी प्राणियों की स्वतंत्रता, मानव की स्वतंत्रता से अलग नहीं है। पृथ्वी की सुरक्षा, हमारे अधिकार और कर्तव्यों का एक दूसरे से घनिष्ट सम्बंध है, इन सम्बंधो से हमें लोभ-लालच और घृणा के आधार पर बने कानून एवं नीतियों को बदलने की शक्ति मिलती है। भारत सहित आज पूरी दुनिया कार्पोरेट जगत की छल-कपट की लहर का सामना कर रही है। बहुराष्ट्रीय कम्पनियां ईमानदार और परिश्रमी व्यक्तियों से उनका रोजगार छीनकर, भोजन को चुराकर, उनको गरीबी, भुखमरी और बीमारियों के भंवर में धकेलने पर लगी हुई हैं। एक अकेली ईस्ट इंडिया कम्पनी ने ही भारत में लूट मचाकर 60 मिलियन लोगों को मौत की नींद सुला दिया था। आज भौगोलीकरण के बाद बहुराष्ट्रीय कम्पनियां फिर से औपनिवेश के माध्यम से हमारे बीज, भोजन और आजीविका के साथ ही हमारे मन तथा गोपनीयता से लगान वसूल रही हैं। हिंसा और लालच का यह तंत्र मानवता और गणतांत्रिक सम्प्रभुता के लिए खतरा है, इसी के चलते अब तक भारत के 300,000 किसान विवश होकर आत्महत्या कर चुके हैं। हम जानते हैं कि इन संख्या और शक्ति के लिहाज से ये कम्पनियां बहुत बड़ी हैं, लेकिन हमें न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोषा है, हमारी शक्ति वे लोग हैं जो जहरीली अर्थव्यवस्था और जहरीले उद्योगों का साथ नहीं देंगे। इसी जनशक्ति के बल पर हम कई जनसभाएं करते आ रहे हैं, हमने मोनसेंटो के विरूद्ध 14 से 16 अक्टूबर, 2016 को हेग में एक अंतरराष्ट्रीय जनसभा का आयोजन किया। कुछ ही दिन पहले, 29 नवम्बर 2016 को हमने भोपाल गैस नरसंहार के लिए जिम्मेदार डाव और डूपोण्ड के विरूद्ध जनसभा को आयोजन किया। अब हम समूचे भारत में जनसभाओं का आयोजन करने जा रहे हैं, जिसमें सबसे पहली जनसभा मोनसेंटो और बायर जैसी कम्पनियों के द्वारा किये गये अपराधों पर होगी, और अंत में जैविक भारत 2047 के रूप में एक नए भारत और ’वसुधैव कुटुम्बकम’ के लिए मिलकर प्रण लिया जाएगा। हम जहरीले और हत्यारे समूह के खिलाफ जैविक खेती, अन्नपूर्णा तथा अन्नम् पर अधारित जैविक अर्थव्यवस्था का एक विकल्प लाने जा रहे हैं। भारत भूमि दुनियाभर में अनोखे पारिस्थितिक विकल्प और जैवविधता के ज्ञान के लिए आज भी मशहूर है। हम विषमुक्त खेती के माध्यम से भारत जैसे दो देशों का भरण-पोषण कर सकते हैं। मानव रक्त को बहाने वाले जीएमओ, महंगे तथा जहरीले रसायनों को रोककर जैविक खेती के माध्यम से किसानों की आमदनी में 10 गुना वृद्धि की जा सकती है । हम जैव विविधता और विषमुक्त खेती के आधार पर भारत को कम्पनी राज की विषंगतियों से मुक्त कर देंगे। भारत को लूटने के लिए, यहां की समृद्धि पर डाका डालने के लिए और बर्बरतापूर्वक शासन करने के लिए सन् 1600 में ईस्ट इंडिया कम्पनी की स्थापना की गई। हमने 1857 में आजादी का पहला युद्ध लड़ा। आजादी की दूसरी लड़ाई में हमने राजनीतिक स्वतंत्रता प्राप्त की। अब हम आजादी की तीसरी लड़ाई लड़ रहे हैं। यह लड़ाई हर प्रकार के कम्पनी राज तथा जहरीले व्यापार से हमें मुक्ति देगी। इस नई आजादी के माध्यम से हम जहर मुक्त भविष्य, कम्पनी राज मुक्त भारत, समग्र जैविक खेती और मानव में अहिंसक प्रवृति की स्थापना करेंगे। हम अगले 30 साल तक ऐसे बीज बोएंगे जिनसे बीमारी मुक्त, कर्ज मुक्त, कुपोषण मुक्त, भुखमरी मुक्त और आत्महत्या से मुक्त -जैविक भारत 2047 का निर्माण किया जा सके। नवधान्य के प्रारम्भिक 30 साल बीजों की आजादी (बीज सत्याग्रह), भोजन की आजादी (अन्न स्वराज), के लिए समर्पित रहे। 2047 में भारत की आजादी के 100 साल पूरे होने जा रहे हैं। आगामी 30 वर्ष में हम अपनी आजादी की रक्षा करने का संकल्प लेते हैं। हम जैविक भारत 2047 के लिए बीज स्वराज, अन्न स्वराज, भू स्वराज, जल स्वराज तथा ज्ञान स्वराज के संकल्प को दोहराते हैं। बीज स्वराज, अन्न स्वराज, भू स्वराज और जैविक क्रांति के माध्यम से जैविक भारत 2047 हेतु हम से जुड़िए।

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